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बढ़ता ऑनलाइन फ्रॉड: आम आदमी कैसे बन रहा है निशाना?

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Blitz Samay
September 22, 2026
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बढ़ता ऑनलाइन फ्रॉड: आम आदमी कैसे बन रहा है निशाना?

एक फोन कॉल, एक लिंक और कुछ मिनटों में खाली हो सकता है बैंक खाता

एक अनजान नंबर से फोन आता है। सामने वाला खुद को बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताता है। वह कहता है कि आपके नाम से कोई संदिग्ध लेन-देन हुआ है या आपका बैंक खाता बंद होने वाला है। घबराहट पैदा की जाती है और फिर शुरू होता है असली खेल—OTP, बैंक विवरण या पैसे ट्रांसफर करने का दबाव।

ऑनलाइन ठगी अब केवल तकनीक जानने वाले अपराधियों का खेल नहीं रही। यह एक संगठित साइबर अपराध के रूप में तेजी से सामने आ रही है। भारत में 2025 में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 24.02 लाख वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हुईं और इनमें रिपोर्ट की गई रकम करीब 22,495 करोड़ रुपये थी। 2021 में ऐसी शिकायतों की संख्या 2.63 लाख थी।

ठगी के तरीके हुए ज्यादा चालाक

साइबर ठग अब केवल फर्जी लिंक भेजने तक सीमित नहीं हैं। वे लोगों की पहचान, डर और भरोसे का इस्तेमाल कर रहे हैं।

फर्जी KYC, बैंक या कूरियर के नाम पर फोन, नकली निवेश योजनाएं, UPI से जुड़े बहाने, सोशल मीडिया पर दोस्ती और फिर पैसे की मांग जैसे तरीके सामने आते रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा ‘डिजिटल अरेस्ट’ की हुई है।

I4C की एडवाइजरी साफ कहती है कि भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी अवधारणा नहीं है। अपराधी पुलिस या अन्य कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल या फोन पर गिरफ्तारी का डर दिखा सकते हैं।

डर को हथियार बनाते हैं ठग

डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में ठगों का तरीका तकनीकी से ज्यादा मनोवैज्ञानिक होता है। पीड़ित को लगातार फोन पर रखा जाता है, उसे किसी से बात करने से रोका जाता है और तत्काल पैसे भेजने के लिए दबाव बनाया जाता है।

2026 में सामने आए एक CBI मामले में एक वरिष्ठ नागरिक को कथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 25.65 लाख रुपये दो बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। CBI ने लोगों को ऐसे मामलों में सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करने की सलाह दी।

नुकसान के बाद भी उम्मीद की एक खिड़की

साइबर फ्रॉड होने के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। सरकार ने वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग के लिए 1930 हेल्पलाइन और National Cyber Crime Reporting Portal की व्यवस्था की है।

I4C के अनुसार 30 जून 2026 तक CFCFRMS व्यवस्था के जरिए 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बचाई गई। इसका उद्देश्य धोखाधड़ी के पैसे को आगे जाने से रोकना और संबंधित बैंकों तथा कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के बीच तेजी से कार्रवाई करना है।

इसलिए ठगी होने पर शर्म या डर में चुप रहना नुकसान बढ़ा सकता है। जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी जल्दी रकम को रोकने की कोशिश की जा सकती है।

UPI इस्तेमाल करते समय एक जरूरी बात

RBI की उपभोक्ता जागरूकता सलाह के अनुसार किसी से पैसा प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती। अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए QR कोड को स्कैन करना या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना भी जोखिम पैदा कर सकता है।

इसी तरह बैंक, RBI या सरकारी एजेंसी के नाम पर धमकी देने वाले फोन पर व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। RBI लोगों को ऐसे मामलों में घबराने के बजाय कॉल करने वाले की पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित करने और संदिग्ध मामले की तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह देता है।

सरकार भी बदल रही है रणनीति

साइबर अपराध का मुकाबला अब केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है। I4C ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ संदिग्ध खातों की पहचान के लिए Suspect Registry जैसी व्यवस्था विकसित की है। 30 जून 2026 तक इससे जुड़े आंकड़ों में 32.08 लाख Layer-1 mule accounts साझा किए गए और 25,698 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन को रोका गया।

मई 2026 में I4C और RBI Innovation Hub के बीच हुए समझौते का उद्देश्य भी AI और डेटा विश्लेषण के जरिए संदिग्ध ‘mule accounts’ और वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की पहचान मजबूत करना है।

बचाव की पहली शर्त: घबराएं नहीं

ऑनलाइन ठगी में सबसे बड़ा हथियार हमेशा तकनीक नहीं होता—कई बार डर और जल्दबाजी होता है।

इसलिए कुछ नियम याद रखना जरूरी है:

  • OTP, UPI PIN, CVV या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
  • अनजान व्यक्ति के कहने पर QR कोड स्कैन न करें।
  • संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
  • पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी के नाम पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी मिले तो पैसे न भेजें।
  • बैंक या संस्था का नंबर खुद आधिकारिक वेबसाइट से लेकर सत्यापन करें।
  • ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

डिजिटल दुनिया ने पैसे भेजना आसान बना दिया है। लेकिन उसी तेजी ने ठगी को भी तेज कर दिया है। अब साइबर सुरक्षा केवल कंप्यूटर विशेषज्ञों का विषय नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की जरूरत है जिसके हाथ में स्मार्टफोन और बैंक खाता है।

क्योंकि ऑनलाइन फ्रॉड में सबसे महंगी गलती अक्सर वह होती है, जो कुछ सेकंड की घबराहट में की जाती है।

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